मेरठ। गंगा किनारे की हवा, गांव की मिट्टी की सोंधी खुशबू, देसी रसोई की महक और आधुनिक सुविधा का संयोजन, मेरठ के परीक्षितगढ़ ब्लाक का सिकंदरपुर गांव इन दिनों इसी वजह से चर्चा में है। प्रधान की पहल पर ग्राम पंचायत की जमीन पर तैयार किया गया इको रिसोर्ट अब सिर्फ एक निर्माण नहीं, बल्कि एक ऐसी ग्रामीण सोच का प्रतीक बन गया है, जो विकास को रोजगार, पर्यटन और आत्मनिर्भरता से जोड़ती है। यही नहीं गांव में कूड़ा निस्तारण प्लांट भी लगाया गया है, जहां पूरे गांव से ई-रिक्शा के जरिए कूड़ा कलेक्शन करके गीला और सूखा कूड़ा अलग किया जाता है। प्रधान सुषमा ने बताया कि इसके बाद कूड़े को भूड़बराल के विद्युत उत्पादन प्लांट बेचा जाता है। जिससे सालभर में 30 से 50 हजार रुपये आमदनी ग्राम पंचायत को होती है। गांव में करीब 1200 परिवार रहते हैं। गांव के नाली मुक्त बनाने के लिए हर घर के पीछे के हिस्से में कुछ जगह छोड़ी हुई है। जहां पर रसोई और नहाने का पानी जाता है। इस जगह में हर घर के लोग सब्जी और फल उगाते हैं। शौचालय भी सोख्ते वाले बनाए गए हैं। गांव की प्रधान सुषमा ने मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत मिली 20 लाख रुपये की राशि को ईको रिसोर्ट परियोजना में लगाया। प्रधान ने बताया कि गांव में बुनियादी विकास पूरा करने के बाद उन्होंने ऐसी योजना पर काम करने का फैसला किया, जिससे ग्राम पंचायत की आय में बढ़ोतरी हो। उनके दिमाग में यह विचार अचानक नहीं आया।
आत्मनिर्भरता की मिसाल- प्रधान की नवाचारी पहल से आत्मनिर्भरता की राह पर सिकंदरपुर गांव
